Wednesday, 11 January 2017

कैश लेस और बैग लेस युग में दिव्यांगो की शिक्षा का विशेष मंच "Voice For Blind"

दोस्तों, एक पंक्ति बहुत कॉमन है कि, “जो दिखता है वो बिकता है” सच तो ये भी है कि, ऐसे कई आयाम हैं जो दिखते नही परंतु सफल विकास में नींव के पत्थर की तरह मजबूत आधार प्रदान करते हैं। फिल्मों की सफलता के पीछे हजारों ऐसे हाँथ होते हैं जो दिखते नहीं, किसी भी शानदार इमारत की नींव दिखती नही परंतु इमारत को चिरकाल तक स्थाई रखने में नींव के योगदान को नकारा नही जा सकता। आज विकास के इस दौर में रोटी, कपङा और मकान के साथ शिक्षा एवं रोजगार भी मूलभूत आवश्यकता है। शिक्षा की इस मूहीम में वॉइस फॉर ब्लाइंड अपने दृष्टी दिव्यांग साथियों को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने में प्रयासरत है। 

आज भारत डिजिटल इंडिया की ओर बढ रहा है, जहाँ शिक्षा के आयाम भी बदल रहे हैं। नित नई टेक्नोलॉजी के साथ हमसब कदम ताल करते हुए आगे बढ रहे हैं। जहाँ तीन दशक पहले अपने 
दृष्टी  दिव्यांग साथी कैसेट के माध्यम से पढते थे, वहीं आज ई लर्निंग के तहत गूगल ड्राइव, पेन ड्राइव के साथ यूट्यूब तथा वाट्सएप पर शिक्षा अर्जित कर रहे हैं। शिक्षा के ये नये आयाम अपने  दृष्टी दिव्यांग साथियो की पढाई को सुगम बना रहे हैं। मित्रों, ये लेख लिखने का खास मकसद है, 
दरअसल वॉइस फॉर ब्लाइंड ई लर्निंग का ऐसा मंच है जो दिखता नही किंतु हजारों प्रिंट दिव्यांग साथियों को देश दुनिया की जानकारी से अपडेट कराते हुए, शिक्षा की अलख वाट्सएप तथा यूट्यूब के माध्यम से प्रदान कर रहा है जिसके प्रकाश में इंदौर के अलावा भारत के विभिन्न राज्यों के दृष्टी दिव्यांग साथी लाभान्वित होकर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं। फिर भी समाज द्वारा अक्सर ये पूछा जाता है कि, आपकी संस्था में  कितने बच्चे रहते हैं? 

दोस्तो, वॉइस फॉर ब्लाइंड ऐसा ई मंच है जहां कागजों और भवनों से परे अनेक दृष्टीदिव्यांग साथी शिक्षित हो रहे हैं। जो उनके लिये ज्यादा सुगम(आसान) है। अहिल्याबाई की पावन नगरी के सभी सम्भ्रांत वर्ग से मेरा विशेष निवेदन है कि, ई लर्निंग के इस प्रयास में वॉइस फॉर ब्लाइंड को अपना भरपूर सहयोग प्रदान करके इंदौर को डिजिटल इंडिया के तहत ई लर्निंग का ऐसा एजुकेशन हब बनाने में सहयोग करें जिसकी आवाज चारों दिशाओं में गुंजायमान हो। इसके तहत इंदौर शहर में पाठ्य सामग्री के ध्वनांकन हेतु एक साउंड प्रूफ स्टुडियो का आगाज है, जहां उच्च तकनिकी माध्यम से ई बुक रेकार्ड की जा सके तथा कम्प्युटर ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से दृष्टी  दिव्यांग साथियों को डिजीटलाइजेशन में पारंगत किया जा सके, ताकि हमारे  दृष्टी दिव्यांग साथी भी कैश लेस और बैग लेस समाज में मुख्यधारा के साथ कदमताल कर सकें। If you want to CONTACT us, Kindly E:- Mail  us at voiceforblind@gmail.com 




Saturday, 31 December 2016

Happy New Year Dear Readers


2017 की सुबह खुशियों का पैगाम लाए, आप सबके इरादों को सुनहरी धूप से रौशन कर जाए ,हर कामयाबी पर आपका नाम दर्ज हो जाये, हौसले इतने बुलंद हों कि जिंदगी से लफ्ज़ ए शिकायत दूर हो जाये। सकारात्मक सोच से बङे से बङा तूफान भी झुकने पर मजबूर हो जाये।  इसी शुभकामना के साथ नव वर्ष की हार्दिक बधाई 😊😊

पूर्व के लेख पढने के लिये लिंक पर क्लीक करेंः- 
बीती ताही बिसार दे, आगे की सुधि लेय

I m Possible

धन्यवाद 😊

Saturday, 24 December 2016

Merry Christmas & Happy B'Day to Atal Bihari Vajpayee



क्रिसमस के शुभअवसर पर आप सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएं।  प्रभु ईशु की अनुकंपा सबपर सदैव बनी रहे।


25 दिसम्बर 1924 को ग्वालियर में जन्मे  भारतरत्न अटलबिहारी वाजपेयी जी को उनके जन्मदिन पर वंदन एवं नमन करते हुए उनके स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं एवं उनकी लिखी कविताओं को स्मरण करते हैं। जो आज भी ताजगी से परिपूर्ण हैं,

बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।


एवं

भारत जमीन का टुकड़ा नहीं,
जीता जागता राष्ट्रपुरुष है।
हिमालय मस्तक है, कश्मीर किरीट है,
पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं।
पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघायें हैं।
कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है।
यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है,
यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है।
इसका कंकर-कंकर शंकर है,
इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है।
हम जियेंगे तो इसके लिये
मरेंगे तो इसके लिये।

एवं

आओ फिर से दिया जलाएँ
भरी दुपहरी में अंधियारा
सूरज परछाई से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें-
बुझी हुई बाती सुलगाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ



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संसदिय गरिमा को आत्मसात करने वाले, आदरणीय अटल जी


उच्च कोटी के वक्ता (अटल बिहारी वाजपेयी)


Thursday, 1 December 2016

विश्वविकलांगता दिवस पर विशेष

हर तारे की एक चमक होती है, हर राह की एक मंजिल होती है। विकलांगता तो महज एक शब्द है, गौर से देखो तो परफैक्ट तो कोई नही है। शारीरिक अक्षमता तो एक स्वरूप है जिसे जीवन का आधार समझना भूल है। हेलेन केलर ने कहा है कि, विश्वास वो शक्ति है जिससे उजङी हुई दुनिया में भी प्रकाश लाया जा सकता है। विश्वास के इसी बल से वर्तमान में पैराऔल्मपिक के प्रतिभावान खिलाडियों ने देश को गौरवान्वित करके ये संदेश दिया कि विकलांगता अभिशाप नही है। नकारात्मक दृष्टीकोंण ही एकमात्र विकलांगता है न की दृष्टीबाधिता। जब हम अरदास या प्रार्थना या पूजा करते हैं उस समय हमारी मुद्रा नही बल्की हमारे ह्रदय की भावना हमें उस अलौकिक शक्ती का एहसास कराती है जिसे हम सब ईश्वर, अल्लहा या ईसा कहते हैं। इसी तरह जब हम जीवन में आगे बढना चाहते हैं, आत्मनिर्भर होना चाहते हैं वहां हमारा मानसिक बल सफलता के द्वार खोलता है। ऐसे कई प्रेरणास्रोत लोग हमारे आस-पास हैं जिन्होने शारीरिक अक्षमता के बावजूद विश्व को नई-नई जानकारियों की सौगात दी है। स्टीफन हॉकिंग ने विकलांगता के बावजूद अंतरिक्ष के ऐसे रहस्यों से पर्दा उठाया है जिस पर दुनिया आश्चर्य करती है। उन्होने कहा कि, उन चिजों पर ध्यान दें जिन्हे अच्छी तरह से करने से आपकी विकलांगता नही रोकती और उन चीजों के लिये अफसोस न करें जिन्हे करने में ये बाधा डालती है। आत्मा और शरीर दोनों से विकलांग न बनें। मित्रों, वास्तविकता तो यही है कि ब्रह्मांड की सारी शक्तियां हममें विद्यमान हैं वो हम हैं कि अंधकार की बात करते हैं। सच तो ये है कि, इंसान के लिये असंभव कुछ नही है। इरादे बुलंद हो तो आज की टेक्नोलॉजी के रथ पर सवार होकर मंजिल पूरी की जा सकती है। सफलता के इस सफर में समाज का साथ सोने में सुहागा की तरह है।

अतः अपने सभी पाठकों से अपील करना चाहते हैं कि अपना सहयोग देकर अपने दृष्टीदिव्यांग साथियों को भी सम्मान से जीने का अवसर प्रदान करें। शिक्षा की इस मुहीम में आपके द्वारा दिया गया आर्थिक सहयोग अनेक दृष्टीदिव्यांग साथियों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान होगा। विश्वविकलांगता दिवस को महज एक दिन के कार्यक्रम तक ही न रहने दें बल्की अपने सहयोग के प्राकाश से अनगिनत आँखों की रौशनी बनकर उनके जीवन में उल्लास भर दें। इस लेख को अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करें जिससे सहयोग की मशाल और अधिक प्रज्वलित हो सके। सहयोग कैसे कर सकते हैं इसके लिये मेल करें.......
धन्यवाद
आपके सहयोग की अभिलाषा लिये 
अनिता शर्मा
 
लिंक पर क्लिक करके इसे भी अवश्य पढें

Tuesday, 22 November 2016

Education is the most powerful weapon..............

मित्रों, शिक्षा सबसे शशक्त हथियार है जिससे दुनिया को बदला जा सकता है। शिक्षा तो समाज एवं देश की प्रगति के लिये एक महत्वपूर्ण तत्व है। हमारा देश तभी विकसित देश बन सकता है जब समाज का प्रत्येक वर्ग शिक्षित होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए अनिता दिव्यांग कल्याण समिति जो विगत छः वर्षों से अपने प्रचलित नाम (वॉइस फॉर ब्लाइंड) के नाम से  दृष्टीदिव्यांग लोगों को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का निरंतर प्रयास कर रही है। 

दृष्टीदिव्यांग लोगों की शिक्षा के सफर में आने वाली में सबसे बङी बाधा है, ध्वनीमुद्रण (Recorded) में पाठ्यपुस्तक का अभाव और परिक्षा के समय  सहलेखन हेतु दृष्टीसक्षम विद्यार्थियों की कमी या कह सकते हैं कि उनमें जागरुकता की कमी। मेरा मानना है कि, यदि सामान्य बच्चों में जागरुकता का अंकुरण सही तरीके से किया जाये तो वे अवश्य परिक्षा के समय सहलेखक का दायित्व निभा सकते हैं। 

साथियों, विगत वर्षों के अपने अनुभव के आधार पर हम हर्ष के साथ आप लोगों को बताना चाहेंगे कि, अनेक मुश्किलों के बावजूद आज कई दृष्टीदिव्यांग साथी शिक्षा अर्जित कर रहे हैं और आगे बढने का प्रयास कर रहे हैं। इन बाधाओं के बावजूद भी जिन बच्चों को शिक्षा के सफर में  समाज का साथ मिल रहा है वो आज बैंक, रेल, विद्यालय तथा अन्य दफ्तरों में भी कार्य करते हुए आत्मनिर्भरता का जीवन यापन कर रहे हैं। समस्या लेकिन ये है कि जितने सहयोग की आवश्यकता है उतना सहयोग अभी मिल नही रहा है। मित्रों मेरा उद्देश्य उनको आत्मनिर्भर बनाना है, अतः शिक्षा के अलावा हम लोग उनको रोजगार के अवसर प्रदान करने का भी प्रयास कर रहे हैं। स्वदेशी निर्मित वस्तुओं के अभियान में हमारे दृष्टीदिव्यांग साथी भी हथकरघा पर दरी, चादर, तौलिया तथा आसन बना रहे हैं। 


आप सबसे हम अनुरोध करना चाहते हैं कि, दृष्टीदिव्यांग साथियों की शिक्षा बाधा मुक्त होकर नई ऊँचाइंयों पर पहुँचे, उनकी शिक्षा सुचारु रूप से चलती रहे इसके लिये आपका सहयोग बहुत जरूरी है। शिक्षा तो अमुल्य और अनश्वर धन है, इसे मुक्त ह्रदय से खर्च किजीये और दृष्टीबाधित लोगों के लिये शिक्षा के इस अभियान में अपना योगदान किजीये। पुस्तक का ध्वनांकन निरंतर और स्पष्ट आवाज में हो इसके लिये हम लोग इंदौर शहर में एक साउंड प्रुफ स्टुडियो का निर्माण करना चाहते हैं, जिसके लिये आर्थिक सहयोग की भी आवश्यकता है एवं इसके साथ ही बच्चोंं को प्रतियोगी परिक्षाओं के लिये एक ट्रेनिंग सेंटर भी खोलना चाहते हैं। 


सभी पाठकों से पुनः निवेदन करना चाहते हैं कि, अपनी क्षमातानुसार आर्थिक सहायता देकर शिक्षा के इस सफर को आप भी अपने सहयोग के दीपक से प्रकाशित करें। आपका सहयोग स्वस्थ और शिक्षित समाज बनाने में महत्वपूर्ण पहल होगी। शिक्षा तो हमारे समाज की आत्मा है जो की एक पीढी से दूसरी पीढी को दी जाती है। अरस्तु ने कहा है, युवकों की शिक्षा पर ही राज्य आधारित है। 

"सूर्यकांत त्रिपाठी के कथन के साथ अपनी कलम को विराम देते हैं, संसार में जितने प्रकार की प्राप्तियां हैं, उनमें शिक्षा सबसे बढकर है।" 

अधिक जानकरी के लिये आप मेल करें
voiceforblind@gmail.com 

धन्यवाद 

Thursday, 27 October 2016

शुभ दीपावली



 सबके जीवन में हर्षोउल्लास, प्रतिष्ठा तथा समृद्धी का दीपक सदैव प्रज्वलित रहे। इसी मंगलकामना के साथ  एक भारत श्रेष्ठ भारत के सभी जन को दीपावली की हार्दिक बधाई, आइये दीपों के इस त्योहार में एक दीपक अपने फौजी साथियों की मंगलकामना के लिये भी रौशन करें। हम सब मिलकर ये कामना करें कि, दीपोत्सव का ये पर्व सबके जीवन को शुभता के प्रकाश से आलोकित करे। 

शुभ दीपावली मंगल दीपावली 
धन्यवाद 
 अनिता अशोक शर्मा 

पूर्व की पोस्ट पढने के लिये लिंक पर क्लिक करेंः-  

  Happy Deepawali

Monday, 10 October 2016

Happy Dashahara





अमन और शांती के देश में आज  आतंक रूपी रावण का संहार करने के लिये प्रभु राम के अवतार में हमारे देश की सशक्त सेना में अद्भुत शौर्य है। हम सबको अपने विश्वास की भक्ती से  सेना का मनोबल बढाना है तथा अनेकता में एकता की इस धरती पर से सबको मिलकर आतंकवादी रूपी रावण का सर्वनाश करना है।   स्वच्छ और सुंदर भारत का सपना साकार करते हुए दशहरा के इस विजयी पर्व को पूर्णतः सार्थक करना है। इसी प्रण के साथ दशहरे की हार्दिक बधाई 

Saturday, 1 October 2016

एक खत, माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और माननीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु जी को




माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी एवं माननीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु जी
नमस्कार,

विषयः- स्वच्छता अभियान 


सर्वप्रथम आदरणीय प्रधानमंत्री जी  एवं आदरणीय रेल मंत्री जी आप दोनों को कोटी-कोटी धन्यवाद। वर्तमान में देश की दशा और दिशा को स्वच्छ वातावरण की ओर मुखारित करने में आपकी पहल सराहनीय है। ये अभियान निःसंदेह आपके संरक्षण में भारत को स्वच्छता के शिखर पर ले जायेगा  जनभागीदारी से स्वच्छता की ऐसी इबारत लिखेगा कि विश्व भी इसका उदाहरण देगा। परंतु कुछ ऐसे बिंदु भी हैं  जहाँ जनभागीदारी के साथ सरकारी महकमों को भी दृढता से आगे आना होगा। जैसे कि, इक्ठ्ठे किये गये कचरे का समय पर सुनियोजित निपटारा एवं अस्वच्छ क्षेत्रों के प्रतिनीधियों को इस अव्यवस्था का जिम्मेदार ठहरा कर। 


माननीय मोदी जी, हमारे भारत में ही सिक्किम एक ऐसा राज्य है जहाँ सर्वत्र स्वच्छता दृष्टीगोचर होती है। यदि सिक्किम की बात की जाये तो, ये ज्ञात होता है कि, वहाँ कई ऐसे कानून बनाये गये हैं जिसे तोङने पर दंड लगता है। सिक्किम जैसी कानून व्यवस्था  पूरे देश में लागू की जा सकती है क्योंकि हमारे देश में कुछ ऐसी मानसिकता भी है जिनकी चेतना सिर्फ कानून के डर से ही जागृत होती है। ऐसे में मेरे मन में एक विचार है, जिसे आप अपने अनुसार अम्लीजामा पहनाये तो ये स्वच्छ मिशन चीरकाल तक स्थायी रह सकता है और भविष्य में इस प्रयोजन हेतु जागरुकता अभियान चलाने की आवश्यकता न होगी क्योंकि ये एक व्यवस्था बन जायेगी। 


इसकी शुरुवात पार्षद एवं सरपंच से कर सकते हैं, जिस पार्षद एवं सरपंच के एरिया में साफ-सफाई न हो उसकी सरकारी निधी में कटौती कर दी जाये। इसका असर ये होगा कि हमारे जनप्रतिनिधी घर -घर जाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरुक करेंगे जैसे वोट मांगने जाते हैं। दरअसल हर शहर में ऐसी कई झुग्गी - झोपङिया हैं जहाँ स्वच्छता की सबसे ज्यादा आवश्यकता है किंतु वहाँ हमारे जनप्रतिनिधी सिर्फ चुनाव के समय ही जाते हैं। माननिय रेल मंत्री जी आपको इस खत में शामिल करने का आशय भी यही है कि कई शहरों के शुरु होने से पहले रेल की पटरियों के बिलकुल किनारे अनगिनत अवैध झुग्गियां हैं जहाँ गंदगी का विकराल रूप देखा जा सकता है जिसका निवारण रेल मार्ग में पङने वाले सभी ग्राम प्रधान और निकटतम् क्षेत्र के जनप्रतिनिधी के द्वारा ही संभव हो सकता है। स्टेशन भले ही साफ हो लेकिन जो बाहर से आत है उसे  स्टेशन से पहले  बाहर का एरिया ही दिखता है  "First Impression is the last Impression" के आधार पर उसके मन में शहर की नकारात्मक तस्वीर ही बनती है। यदि उदाहरण के तौर पर भोपाल स्टेशन की बात करें तो 2017 में यहाँ भव्य स्टेशन बनने का प्रावधान है किंतु मुम्बई और दिल्ली से जाने वाली गाङियों को भोपाल के बाहर की ऐसी तस्वीर दिखती है जहाँ गंदे पानी के भरे गढ्ढे , झुग्गियों का समूह और कचरे का साम्राज्य है। 


दूसरा विचार है कि, हमारे सभी सरकारी और गैरसरकारी संस्थानो में ये नियम बना दिया जाये कि जिन कर्मचारी के घर के आसपास गंदगी रहेगी उनका सालाना भत्ता रोक दिया जायेगा। जब कंपनियां हेलमेट और सीट बैल्ट के लिये कढाई से पेश आती हैं तो इस पर भी कङा रुख कर सकती हैं, आखिर साफ-सफाई का भी ताल्लुक जीवन से जुङा हुआ है। अनेक जान लेवा बिमारियां गंदगी की ही सौगात है। सभी सरकारी एवं गैरसरकारी विद्यालयों के द्वारा बच्चों और माताओं को  सरस्वती शिशु मंदिर की तर्ज पर यानी पालक संपर्क के माध्यम से समझाया जा सकता है। विद्यालयों में बच्चों द्वारा फैलाई गंदगी पर उन्हे  आर्थिक दंड की बजाय अध्ययन का कुछ अतिरिक्त कार्य देना चाहिये। 

जिस तरह स्वच्छ विद्यालय, शहर और कार्यलयों की जानकारी दी जा रही है उसी प्रकार देश के उन क्षेत्रों को भी सबके समक्ष लाया जाये जहाँ गंदगियों का अम्बार है। इस अभियान के तहत स्वच्छता पर पुरस्कार वितरण उत्तम और मानवीय पहल है परंतु  कुछ कढवी दवाईयों की भी दरकार है। 

गाँधी जयन्ती और लाल बहादुर शास्त्री जी की जयन्ती पर हार्दिक बधाई के साथ स्वच्छता अभियान की  वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई , ये कामना करते हैं कि बहुत जल्द हमारा देश "स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत" के रूप में विश्व में पहचाना जाये और गाँधी जी का सपना साकार हो। 


धन्यवाद
अनिता शर्मा 
दृष्टीदिव्यांग हेतु कार्यरत 



Friday, 30 September 2016

शुभ नवरात्री



नवरात्री के शुभ अवसर पर 
वाइस फॉर ब्लाइंड की तरफ से 
आप सबको हार्दिक बधाई, 
माँ दुर्गा के आशिर्वाद से आप सबके जीवन में
खुशियों की बहार आये, 
आपका जीवन मंगलमय दीपों से रौशन हो 
जय माता दी 

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शक्ति और प्रकृती

शक्ति की उपासना का पर्व




Friday, 16 September 2016

Rio Paralympic 2016 (Congratulations) Devendra Jhanjhariya

रियो पैरालिंपिक 2016 में देवेन्द्र झांझरिया ने लिखी एक नई इबारत भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) प्रतियोगिता में अपना ही पिछला विश्व रेकार्ड तोङते हुए नया विश्व कीर्तिमान रचते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। राजस्‍थान के चुरू जिले से ताल्‍लुक रखने वाले देवेंद्र जब आठ साल के थे तो पेड़ पर चढ़ने के दौरान एक इलेक्ट्रिक केबिल की चपेट में आ गए थे। जिसकी वजह से डॉक्‍टरों को उनका बायां हाथ काटने के लिए मजबूर होना पड़ा। अपनी विकलांगता को देवेंद्र ने मजबूरी नही बनने दी और लकङी तथा सरकंडे का भाला बनाकर अभ्यास करने लगे। उनके जज़्बे ने एक नई पहचान दी और देवेंद्र ने अनेक पुरस्कारों के साथ नया कीर्तिमान रचा। राजस्थान सरकार ने बुधवार को रियो पैरालिंपिक-2016 में भालाफेंक स्पर्धा का गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय पैरा-एथलीट देवेंद्र झझारिया को 75 लाख रुपये की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की है। 2002 में देवेंद्र ने कोरिया में आयोजित आठवीं एफईएसपीआईसी खेलों में गोल्‍ड मेडल जीता। 2004 में पहली बार एथेंस पैरालिंपिक खेलों के लिए क्‍वालीफाई किया। उस खेल में उन्‍होंने पुराने 59.77 मी के विश्‍व रिकॉर्ड को तोड़कर 62.15 मी जेवलिन थ्रो करके नया कीर्तिमान बनाया। 2012 में पदम श्री से सम्‍मानित होने वाले देश के पहले पैरालिंपिक खिलाड़ी बने। देवेंद्र ने 2013 में फ्रांस के लियोन में आयोजित आईपीसी एथलेटिक्‍स विश्‍व चैंपियनशिप में स्‍वर्ण पदक जीता। 2014 में दक्षिण कोरिया में आयोजित एशियन पैरा गेम्‍स और 2015 की वर्ल्‍ड चैंपियनशिप में उन्‍होंने सिल्‍वर मेडल हासिल किया। 2014 में फिक्‍की पैरा-स्‍पोर्ट्सपर्सन ऑफ द ईयर चुने गए। देवेन्द्र उपलब्धी ने सिद्ध कर दिया कि---  मंजिल उन्ही को मिलती है, जिनके सपनो में जान होती है। पंखो से कुछ नही होता, हौसलों से उङान होती है।